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अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी 2022

February
इसरो द्वारा वर्ष 2022 में सूर्य का अध्ययन करने के लिए “आदित्य-L 1 मिशन” लॉन्च करने की संभावना है। आदित्य-L1 मिशन को L1 लैग्रेंज प्वाइंट (L1 Lagrange point) में स्थापित किया जाएगा। यह मिशन एस्ट्रोसैट (AstroSat) के बाद इसरो का दूसरा अंतरिक्ष आधारित खगोल विज्ञान मिशन होगा। एस्ट्रोसैट को 2015 में लॉन्च किया गया था।
इसरो इस वर्ष अगस्‍त में चंद्रयान -तीन का प्रक्षेपण करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो ने श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से 2022 के अपने पहले मिशन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल - पीएसएलवी-सी 52 का प्रक्षेपण किया। इस अभियान में तीन उपग्रह प्रक्षेपित किए गए। एक उपग्रह ईओएस-04 राडार इमेजिंग सैटेलाइट, इसके साथ ही आईएनएस-2टीडी तथा इंस्पायर सैट-1 उपग्रह भी प्रक्षेपित किया गया। INSPIRESat-1 को संयुक्त रूप से भारत, अमेरिका, ताइवान और सिंगापुर के विश्वविद्यालयों सहित अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम द्वारा विकसित किया गया है।
भारतीय अं‍तरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो 1975 से लेकर अब तक स्‍वदेश निर्मित 129 उपग्रह और 36 दूसरे देशों के कुल 342 उपग्रह प्रक्षेपित कर चुका है। केन्‍द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्‍टर जितेन्‍द्र सिंह ने राज्‍यसभा में यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि इस समय भारत के कुल 53 उपग्रह काम कर रहे हैं। इनमें से 21 संचार उपग्रह, आठ दिशा सूचक उपग्रह, 21 निगरानी उपग्रह और तीन विज्ञान उपग्रह हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने INSAT-4B, एक भारतीय संचार उपग्रह, जो भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली का हिस्सा है, को निष्क्रिय कर दिया है।
चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के ‘चंद्रयान-2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास)’ पेलोड ने हाल ही में सौर प्रोटॉन घटनाओं का पता लगाया।
रूस ने फ्रेंच गायना से अपने अंतरिक्ष अभियान स्‍थगित कर दिए हैं और तकनीकी कर्मियों को वापस बुला लिया है।
एलोन मस्क के स्टारलिंक (Starlink) ने दर्जनों उपग्रह खो दिए क्योंकि वे 3 फरवरी, 2022 को लॉन्च होने के बाद एक भू-चुंबकीय तूफान में फंस गए थे।
SpaceX ने इटली के पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह, Cosmo-SkyMed Second Generation FM2 (CSG-2) को लॉन्च किया। इसे अमेरिका के फ्लोरिडा के एक स्टेशन से लॉन्च किया गया।
ओशन मेल्टिंग ग्रीनलैंड मिशन, जिसे आमतौर पर OMG मिशन के रूप में जाना जाता है, नासा द्वारा लॉन्च किया गया था। यह पांच साल का मिशन था। यह 31 दिसंबर, 2021 को समाप्त हुआ। इस मिशन ने मुख्य रूप से ग्रीनलैंड में बर्फ के नुकसान को मापा।
नासा के मार्स रेकांसेंस ऑर्बिटर (MRO) ने खोज की है कि मंगल पर दो अरब साल पहले पानी था।
HERMES मिशन एक 4-इंस्ट्रूमेंट सूट है, जिसे नासा के मून-ऑर्बिटिंग गेटवे के बाहर लगाया जाएगा। समीक्षा के दौरान नवंबर 2024 तक लॉन्च के लिए, मिशन के प्रारंभिक डिजाइन और कार्यक्रम योजना का मूल्यांकन किया गया।
नासा द्वारा वित्त पोषित Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System (ATLAS) पहला सर्वेक्षण बन गया है जो हर 24 घंटे में पृथ्वी के निकट की वस्तुओं (Near-Earth Objects – NEOs) के लिए पूरे अंधेरे आकाश की खोज करने में सक्षम है।
हाल ही में SpaceX द्वारा NROL-87 लॉन्च किया गया। इस मिशन के अंतर्गत SpaceX ने अमेरिका के लिए एक जासूसी उपग्रह लॉन्च किया है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 2031 में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) को आधिकारिक तौर पर बंद करने की योजना की घोषणा की है। 1998 में, अंतरिक्ष स्टेशन का पहला टुकड़ा, एक नियंत्रण मॉड्यूल, एक रूसी रॉकेट पर अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था।
नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने अंतरिक्ष से शुक्र की सतह की पहली दृश्यमान प्रकाश छवियां लीं। शुक्र की सतह आमतौर पर घने बादलों से ढकी होती है। लेकिन हाल ही में दो फ्लाईबाई में, पार्कर सोलर प्रोब ने अपने Wide-Field Imager (WISPR) का उपयोग चित्र लेने के लिए किया।
नासा ने सूर्य की गतिशीलता, लगातार बदलते अंतरिक्ष वातावरण और सूर्य-पृथ्वी कनेक्शन पर हमारी समझ में सुधार के लिए दो विज्ञान मिशनों, Multi-slit Solar Explorer (MUSE) और HelioSwarm का चयन किया।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (Indian Institute of Astrophysics) के खगोलविदों ने उच्च संभावना वाले संभावित रहने योग्य ग्रहों की पहचान करने का एक नया तरीका विकसित किया है। खगोलविदों ने यह नया तरीका BITS पिलानी, गोवा परिसर के खगोलविदों के सहयोग से विकसित किया है।
January
प्रख्यात रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस से पहले गगनयान मिशन के तहत पूर्व नियोजित दो मानव रहित उड़ानों में से पहली उड़ान का प्रक्षेपण करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 12 जनवरी, 2022 को गगनयान कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक इंजन की योग्यता परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की।
आंध्र प्रदेश की एक युवा लड़की जाह्नवी डांगेती ने अमेरिका के अलबामा में कैनेडी स्पेस सेंटर में नासा के अंतर्राष्ट्रीय वायु और अंतरिक्ष कार्यक्रम (IASP) को पूरा किया है, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी की दूरी पर अपने अंतिम गंतव्य पर पहुंच गया है। यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष के एक क्षेत्र में परिक्रमा करेगा जिसे लैग्रेंज बिंदु (Lagrange point) के रूप में जाना जाता है, जहां सूर्य और पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण खिंचाव घूर्णन प्रणाली के केन्द्रापसारक बल (centrifugal force) द्वारा संतुलित किया जाता है। इसे नासा, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था। इसे एरियन रॉकेट से लॉन्च किया गया था।
हाल ही में, इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च के कर्टिन यूनिवर्सिटी नोट के साथ खगोलविदों को एक वस्तु (object) मिली, जिसे “अल्ट्रा-लॉन्ग-पीरियड मैग्नेटर” कहा जाता है।
‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) के अध्यक्ष ने अप्रैल 2022 में ‘SSLV-D1 माइक्रो सैट’ के प्रक्षेपण का उल्लेख किया है। SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) का उद्देश्य छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निम्न कक्षा में लॉन्च करना है।
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