मेवाड़ का गुहिल वंश
- प्रश्न 158 ‘सूड़ प्रबन्ध’ के लेखक हैं -
Asst. Agriculture Officer - 2011 -
- (अ) प्रताप
- (ब) सांगा
- (स) राजसिंह
- (द) कुम्भा
उत्तर : कुम्भा
व्याख्या :
एकलिंगमाहात्म्य से विदित होता है कि महाराणा कुम्भा वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद्, व्याकरण, राजनीति और साहित्य में बड़ा निपुण था। संगीतराज, संगीतमीमांसा एवं सूड़प्रबन्ध इनके द्वारा रचित संगीत के ग्रन्थ थे।
- प्रश्न 159 निम्नलिखित में से कौनसा दिल्ली सुल्तान गुहिल शासक जैत्रसिंह द्वारा पराजित किया गया था -
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- (अ) बलबन
- (ब) इल्तुतमिश
- (स) रूक्नुद्दीन फिरोजशाह
- (द) नासिरूद्दीन महमुद तुगलक
उत्तर : इल्तुतमिश
व्याख्या :
जैत्रसिंह के समय दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश का नागदा पर आक्रमण हुआ। संम्भवतः इल्तुतमिश ने 1222 ई. से 1229 के मध्य मेवाड़ पर आक्रमण किया। जयसिंह सुरि के हम्मीर मद मर्दन के अनुसार जैत्रसिंह ने इल्तुतमिश को परास्त कर पीछे धकेल दिया (आबु व चीरवा शिलालेख के अनुसार)।
- प्रश्न 160 चम्पानेर की संधि किन राज्यों के बीच हुई -
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- (अ) मालवा और गुजरात
- (ब) मेवाड़ और गुजरात
- (स) मालवा और मेवाड़
- (द) मेवाड़ और मारवाड़
उत्तर : मालवा और गुजरात
व्याख्या :
चंपानेर की संधि 1456 ईस्वी में मालवा के महमूद खिलजी तथा गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन के मध्य महाराणा कुंभा के विरुद्ध हुई थी जिसे महाराणा कुंभा ने अपनी कूटनीति से विफल कर दिया
- प्रश्न 161 महाराण प्रताप का राज्याभिषेक हुआ था -
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- (अ) चित्तोड़गढ़ में
- (ब) निम्बाहेड़ा में
- (स) गोगुन्दा में
- (द) बड़ी सादड़ी में
उत्तर : गोगुन्दा में
व्याख्या :
गोगुन्दा में महादेव बावड़ी राणा प्रताप का 32 वर्ष की आयु में 28 फरवरी, 1572 को राज्याभिषेक किया गया। प्रताप कुछ समय के बाद कुम्भलगढ़ चला गया जहां राज्याभिषेक का उत्सव मनाया गया।
- प्रश्न 162 राण सांगा व बाबर के मध्य खानवा का युद्ध हुआ था -
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- (अ) 1527 में
- (ब) 1528 में
- (स) 1529 में
- (द) 1530 में
उत्तर : 1527 में
व्याख्या :
खानवा युद्ध राणा सांगा एवं मुगल सम्राट जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर के मध्य 17 मार्च, 1527 ई. को बयाना के पास (वर्तमान रूपबास) हुआ।
- प्रश्न 163 कर्नल जेम्स टाॅड ने निम्नलिखित में से किस युद्ध को ‘मेवाड़ का मेराथन’ कहकर पुकारा है -
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- (अ) हल्दीघाटी का युद्ध
- (ब) दिवेर का युद्ध
- (स) खानवा का युद्ध
- (द) सारंगपुर का युद्ध
उत्तर : दिवेर का युद्ध
व्याख्या :
‘अमरकाव्य’ के अनुसार 1582 ई. में राणा प्रताप ने मुगलों के विरुद्ध दिवेर (कुंभलगढ़) पर जबरदस्त आक्रमण किया। यहाँ का सूबेदार अकबर का काका सेरिमा सुल्तान खां था। जब कुंवर अमरसिंह ने अपना भाला सेरिमा सुल्तान पर मारा तो भाला सेरिमा के लोहे के बख्तर को चीरते हुए उसके शरीर में प्रवेश कर पार हो गया।
- प्रश्न 164 कुम्भा के विषय में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है -
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- (अ) वह स्वंय विद्वान नहीं था पर विद्वानों को आश्रय देता था।
- (ब) वह कुम्भल दुर्ग का निर्माता था।
- (स) वह संगीत प्रेमी था।
- (द) वह मेवाड़ के महान् शासकों में से एक था।
उत्तर : वह स्वंय विद्वान नहीं था पर विद्वानों को आश्रय देता था।
व्याख्या :
महाराणा कुम्भा न केवल वीर, युद्धकौशल में निपुण तथा कला प्रेमी थे वरन् एक विद्वान तथा विद्यानुरागी भी थे। महाराणा कुम्भा स्वंय वीणा बजाया करते थे। इनके संगीत गुरू सारंग व्यास थे। जबकी इनके गुरू जैन आचार्य हीरानंद थे।
- प्रश्न 165 मेवाड़ का भीष्म पितामह किसे कहा जाता है -
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- (अ) महाराणा लखा
- (ब) युवराज चूड़ा
- (स) मोकल
- (द) रणमल
उत्तर : युवराज चूड़ा
व्याख्या :
मेवाड़ का भीष्म पितामह युवराज चूड़ा को कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हंशा बाई व पिता लाखा के विवाह की शर्त को पूरा करने के लिए आजीवन मेवाड़ सिहासन का संरक्षक बने रहने की प्रतिज्ञा की थी। भीष्म अथवा भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म महाराजा शान्तनु और देव नदी गंगा की आठवीं सन्तान थे। उनका मूल नाम देवव्रत था। भीष्म में अपने पिता शान्तनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की भीषण प्रतिज्ञा की थी।
- प्रश्न 166 राणा कुम्भा को राजस्थान का ‘अभिनवभरताचार्य’ कहा गया है क्योंकि -
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- (अ) संगीत प्रेमी थे
- (ब) लिखने के प्रेमी थे
- (स) दुर्ग प्रेमी थे
- (द) युद्ध प्रेमी थे
उत्तर : संगीत प्रेमी थे
व्याख्या :
राणा कुंभा राजपूताना के सभी शासकों में सर्वोपरि है, इसलिए उसे ‘हिन्दु सुरताण’ तथा संगीत प्रेमी होने के कारण ‘अभिनव भारताचार्य’ व ‘वीणावादन प्रवीणेन’ कहा जाता है।
- प्रश्न 167 1903 एवं 1911 में आयोजित दिल्ली दरबार में राजस्थान के किस शासक ने भाग नहीं लिया था -
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- (अ) खेतड़ी के शासक अजीतसिंह
- (ब) मेवाड़ के महाराणा सज्जनसिंह
- (स) उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह
- (द) महाराजा गंगासिंह
उत्तर : उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह
व्याख्या :
1911 में भारत में जॉर्ज पंचम के आगमन पर, फतेह सिंह दिल्ली दरबार में भाग लेने के लिए दिल्ली गए, लेकिन केसरी सिंह बारहठ द्वारा लिखित चेतावणी रा चूंगत्या को पढ़ने के बाद दिल्ली दरबार में भाग लिए बिना मेवाड़ लौट आए।
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