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विजयनगर साम्राज्य

प्रश्न 21 कृष्णदेव राय द्वारा निम्नलिखित किस कवि को ‘आन्ध्र कविता पितामह’ की उपाधि दी गयी थी -
RAS (Pre) Exam - 2023
  • (अ) अल्लसानी पेड्डना
  • (ब) भट्टमूर्ति
  • (स) तेनाली रामकृष्ण
  • (द) पिंगली सूरन्ना
उत्तर : अल्लसानी पेड्डना
व्याख्या :
विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय ने आमुक्त माल्यद ग्रंथ की रचना की। कृष्णदेव राय को आन्ध्र भोज के नाम से भी जाना जाता है। उनके दरबार को अल्लसानी पेड्डना नामक राजकवि सुशोभित करते थे। कृष्णदेव राय द्वारा कवि अल्लसानी पेड्डना को ‘आन्ध्र कविता पितामह’ की उपाधि दी गयी थी।
प्रश्न 22 विजयनगर पर सर्वाधिक समय तक शासन करने वाला वंश था-
  • (अ) संगम वंश
  • (ब) तालुव वंश
  • (स) अराविडु वंश
  • (द) तुलुव वंश
उत्तर : संगम वंश
व्याख्या :
संगम वंश ने लगभग 150 वर्षों तक विजयनगर पर अपना आधिपत्य बनाये रखा।
प्रश्न 23 विजयनगर साम्राज्य के किस शासक की उपाधि का नाम ‘गजबटेकर (हाथियों का शिकारी)’ मिलता है -
  • (अ) कृष्णदेव राय
  • (ब) सदाशिव राय
  • (स) बुक्का प्रथम
  • (द) देवराय द्वितीय
उत्तर : देवराय द्वितीय
प्रश्न 24 सुमेलित कीजिए-
राजवंशसंस्थापक
(1) संगम वंश(A) हरिहर व बुक्का
(2) सालुव वंश(B) वीर नरसिंह
(3) तुलुव वंश(C) तिरुमल्ल
(4) अरावीडु वंश(D) नरसिंह सालुव
1 2 3 4
  • (अ) A B C D
  • (ब) D C B A
  • (स) A D B C
  • (द) B C A D
उत्तर : A D B C
व्याख्या :
संगम वंश: इसकी स्थापना हरिहर और बुक्का ने की थी। यह विजयनगर साम्राज्य का पहला राजवंश था।
सालुव वंश: नरसिंह सालुव ने संगम वंश का अंत करके सालुव वंश की स्थापना की।
तुलुव वंश: वीर नरसिंह ने तुलुव वंश की शुरुआत की।
अरावीडु वंश: तिरुमल्ल ने तुलुव वंश के बाद इस वंश को स्थापित किया।
प्रश्न 25 निम्न में से कौन-सा/से शासक संगम वंशीय है/हैं -
A. हरिहर I B. बुक्का I C. देवराय
D. कृष्ण देवराय E. तिरूमल
  • (अ) A तथा B
  • (ब) A, B तथा C
  • (स) A, C, D तथा E
  • (द) उपरोक्त सभी
उत्तर : A, B तथा C
व्याख्या :
कृष्णदेवराय तुलुव वंश का तथा तिरूमल अराविडु वंश का शासक था।
प्रश्न 26 कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने “भाव चिंता रत्न” एवं “वीरशैवामृत” ग्रन्थ किस भाषा में लिखे थे -
Raj. State and Sub. Services Comb. Comp. (Pre) Exam - 2024
  • (अ) संस्कृत
  • (ब) तमिल
  • (स) तेलुगू
  • (द) कन्नड़
उत्तर : कन्नड़
व्याख्या :
मल्लनार्य (कृष्णदेवराय के दरबार में) ने “भाव चिंतारत्न” और “वीरशैवामृत” कन्नड़ भाषा में लिखे थे।

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