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मेवाड़ का गुहिल वंश

प्रश्न 363 मेवाड़ के किस महाराणा ने मुगलों से संधि की थी -
  • (अ) जगतसिंह
  • (ब) उदयसिंह
  • (स) अमरसिंह
  • (द) महाराणा प्रताप
उत्तर : अमरसिंह
व्याख्या :
सभी सामंतों, दरबारियों एवं कुंवर कर्णसिंह के निवेदन पर राणा अमरसिंह ने अपना मन मारकर मुगलों से 5 फरवरी, 1615 ई. में संधि की। अमरसिंह मुगलों से संधि करने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था।
प्रश्न 364 किस राणा ने हंसाबाई से न केवल शादि से इन्कार किया बल्कि उसके पुत्र मोकल के पक्ष में मेवाड़ की गद्दी त्याग दी -
  • (अ) राणा चूड़ा
  • (ब) राणा संागा
  • (स) राणा कुम्भा
  • (द) राणा उदयसिंह
उत्तर : राणा चूड़ा
व्याख्या :
राणा लाखा के बड़े पुत्र चूँडा ने यह प्रतिज्ञा ली कि ‘मेवाड़ के सिंहासन पर उसका या उसके उत्तराधिकारी का कोई अधिकार नहीं होगा, बल्कि राजकुमारी हंसाबाई से उत्पन्न होने वाली संतान का होगा।’ हंसाबाई ने मोकल को जन्म दिया और वह मेवाड़ का राणा बना न कि चूँडा।
प्रश्न 365 राजस्थान में स्थापत्य कला का जन्मदाता किसे माना जाता है -
  • (अ) राणा कुम्भा
  • (ब) राणा सांगा
  • (स) राणा हम्मीर
  • (द) महाराज कर्णसिंह
उत्तर : राणा कुम्भा
व्याख्या :
राणा कुम्भा (1433-1468 ईस्वी) को राजस्थानी वास्तुकला का जनक माना जाता है। अपने शासनकाल में उन्होंने मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया था।
प्रश्न 366 बप्पा रावल ने चितौड़ में मेवाड़ राज्य की स्थापना कब की थी -
  • (अ) 815 ई.
  • (ब) 765 ई.
  • (स) 728 ई.
  • (द) 828 ई.
उत्तर : 728 ई.
व्याख्या :
बापा रावल हारीत ऋषि की गायें चराते थे। हारीत ऋषि की अनुकम्पा से ही बापा रावल ने मेवाड़ का राज्य प्राप्त किया था। बापा रावल ने मौर्य शासक मान मोरी को पराजित कर सत्ता स्थापित की। कविराजा श्यामलदास ने ‘वीर विनोद’ में बापा द्वारा मौर्यों से चित्तौड़ दुर्ग छीनने का समय 734 ई. बताया है।
प्रश्न 367 संगीतराज नामक कृति किस राजपूत शासक की रचना है -
  • (अ) महाराणा प्रताप
  • (ब) महाराणा कुम्भा
  • (स) बाप्पा रावल
  • (द) महाराणा जयसिंह
उत्तर : महाराणा कुम्भा
व्याख्या :
संगीतराज, संगीतमीमांसा एवं सूड़प्रबन्ध महाराणा कुम्भा के द्वारा रचित संगीत के ग्रन्थ थे। ‘संगीतराज’ के पांच भाग- पाठरत्नकोश, गीतरत्नकोश, वाद्यरत्नकोश, नृत्यरत्नकोश और रसरत्नकोश हैं।
प्रश्न 368 किस खिलजी वंश के शासक ने 1303 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण किया था -
  • (अ) जलालुदीन खिलजी
  • (ब) महमूद खिलजी
  • (स) अलाउदीन खिलजी
  • (द) इब्राहिम लोदी
उत्तर : अलाउदीन खिलजी
व्याख्या :
चित्तौड़ का युद्ध मेवाड़ के शासक रावल रतनसिंह (1302-03 ई.) एवं दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) के मध्य 1303 ई. में हुआ था।
प्रश्न 369 निम्न में से किनके शासनकाल को मेवाड़ की चित्रकला के इतिहास का स्वर्ण-युग माना जाता है -
  • (अ) राणा कुम्भा
  • (ब) महाराणा अमरसिंह
  • (स) महाराणा प्रताप
  • (द) महाराणा संग्राम सिंह
उत्तर : महाराणा अमरसिंह
व्याख्या :
मेवाड़ शैली की उत्पत्ति सामान्यतया 1605 ई. में निसारदीन द्वारा चुनार में चित्रित रागमाला चित्रों से मानी जाती है। इन चित्रों के अंतिम पृष्ठ पर दिए विवरण द्वारा उक्त महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त होती हैं।
प्रश्न 370 चित्तौड़ में विजय स्तम्भ का निर्माण किसने कराया था -
  • (अ) महाराणा बप्पा
  • (ब) महाराणा उदय सिंह
  • (स) महाराणा प्रताप
  • (द) महाराणा कुम्भा
उत्तर : महाराणा कुम्भा
व्याख्या :
राणा कुम्भा ने सारंगपुर विजय के उपलक्ष में विजय स्तंभ बनवाया था।
प्रश्न 371 किस शासक की मृत्यु पर विलाप के लिए ‘राणे जगपत रा मरसिया’ लिखा गया था -
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  • (अ) महाराणा जगत सिंह
  • (ब) महाराणा जय सिंह
  • (स) महाराणा राज सिंह
  • (द) महाराणा राजवीर सिंह
उत्तर : महाराणा जगत सिंह
व्याख्या :
मरस्य से तात्पर्य ‘शोक काव्य’ से है। किसी व्यक्ति विशेष की मृत्यु के पश्चात् शोक व्यक्त करने के लिए ‘मरस्या’ काव्यों की रचना की जाती थी। इसमें उस व्यक्ति के चारित्रिक गुणों के अतिरिक्त अन्य महान कार्यो का वर्णन भी किया जाता था।
राणे जगपत रा मरस्या- यह मरस्य मेवाड़ महाराणा जगतसिंह की मृत्यु पर शोक प्रकट करने के लिए लिखा था।
प्रश्न 372 मेवाड़ का वह प्रसिद्ध शासक कौन था जिसने अचलगढ़ के किले की मरम्मत करवाई थी -
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  • (अ) राणा रतन सिंह
  • (ब) महाराण कुंभा
  • (स) राणा सांगा
  • (द) महाराजा राज सिंह
उत्तर : महाराण कुंभा
व्याख्या :
महाराणा कुंभा मेवाड़ के एक प्रसिद्ध शासक थे जिन्होंने अचलगढ़ किले की मरम्मत करवाई थी। कीर्तिस्तम्भ के अनुसार केन्द्रीय शक्ति को पश्चिमी क्षेत्र में अधिक सशक्त बनाये रखने के लिए और सीमान्त भागों को सैनिक सहायता पहुँचाने के लिए आबू में 1509 वि.सं. में अचलगढ़ (सिरोही) का दुर्ग बनवाया गया। यह दुर्ग परमारों के प्राचीन दुर्ग के अवशेषों पर इस तरह से पुनर्निर्मित किया गया था कि उस समय की सामरिक व्यवस्था के लिए उपयोगी प्रमाणित हो सके।

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