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गुर्जर प्रतिहार वंश

प्रश्न 1   किस प्रतिहार राजा के काल में ग्वालियर प्रशस्ति की रचना हुई -
 (अ) मिहिर भोज
 (ब) महिपाल प्रथम
 (स) महिपाल द्वितिय
 (द) महेन्द्र पाल प्रथम

उत्तर : मिहिर भोज
व्याख्या :
ग्वालियर अभिलेख में मिहिरभोज प्रथम(836-885 ई.) की उपाधि आदिवराह मिलती है। वहीं दौलतपुर अभिलेख इन्हें प्रभास कहता है। इनके समय प्रचलित चांदी ओर तांबे के सिक्कों पर ‘श्रीमदादिवराह’ अंकित था।

प्रश्न 2   किस प्रतिहार राजा ने ‘आदिवराह’ की उपाधि ग्रहण की -
 (अ) मिहिर भोज
 (ब) महेन्द्रपाल
 (स) वत्सराज
 (द) नागभट्ट द्वितीय

उत्तर : मिहिर भोज
व्याख्या :
ग्वालियर अभिलेख में मिहिरभोज प्रथम(836-885 ई.) की उपाधि आदिवराह मिलती है। वहीं दौलतपुर अभिलेख इन्हें प्रभास कहता है। इनके समय प्रचलित चांदी ओर तांबे के सिक्कों पर ‘श्रीमदादिवराह’ अंकित था।

प्रश्न 3   प्रतिहार वंश का अंतिम शासक था -
 (अ) महिरभोज
 (ब) यशपाल
 (स) राज्यपाल
 (द) महिपाल

उत्तर : यशपाल
व्याख्या :
प्रतिहारों का अन्तिम राजा यशपाल था।

प्रश्न 4   महान संस्कृति कवि राजशेखर निम्न में से किसके दरबारी कवि थे -
 (अ) यशपाल
 (ब) महेन्द्रपाल प्रथम
 (स) महिपाल
 (द) राज्यपाल

उत्तर : महेन्द्रपाल प्रथम
व्याख्या :
महेन्द्रपाल प्रथम(885-910 ई.) के गुरू व आश्रित कवि राजशेखर थे। राजशेखर ने कर्पूरमंजरी, काव्यमीमांसा, विद्धसालभंज्जिका, बालभारत, बालरामायण, हरविलास और भुवनकोश की रचना की।

प्रश्न 5   चीनी यात्री जिसने भीनमाल की यात्रा की थी -
 (अ) सुंगयान
 (ब) ह्वेनसांग
 (स) फाह्यान
 (द) इत्सिंग

उत्तर : ह्वेनसांग
व्याख्या :
चीनी यात्री ह्वेनसांग जब भीनमाल आया तो उसने अपने 72 देशों के वर्णन में इसे कू-चे-लो(गुर्जर) बताया तथा उसकी राजधानी का नाम ‘पीलोमोलो/भीलामाल’ यानि भीनमाल बताया।

प्रश्न 6   आदिवराह की उपाधि जिस राजपूत शासक ने धारण की वह है-
 (अ) मिहिरभोज
 (ब) यशपाल
 (स) राज्यपाल
 (द) महिपाल

उत्तर : मिहिरभोज
व्याख्या :
ग्वालियर अभिलेख में मिहिरभोज की उपाधि आदिवराह मिलती है। वहीं दौलतपुर अभिलेख इन्हें प्रभास कहता है। इनके समय प्रचलित चांदी ओर तांबे के सिक्कों पर ‘श्रीमदादिवराह’ अंकित था।

प्रश्न 7   मुहणौत नैणसी ने गुर्जर-प्रतिहारों की कितनी शाखाओं का वर्णन किया है-
 (अ) बाईस
 (ब) चौबीस
 (स) छब्बीस
 (द) चालिस

उत्तर : छब्बीस
व्याख्या :
नैणसी ने गुर्जर प्रतिहारों की 26 शाखाओं का वर्णन किया है।

प्रश्न 8   प्रतिहारों में ‘रोहिलद्धि’ के नाम से जाना जाता है -
 (अ) महिन्द्रपाल
 (ब) यशपाल
 (स) हरिश्चन्द्र
 (द) प्रभाकर

उत्तर : हरिश्चन्द्र
व्याख्या :
जोधपुर और घटियाला शिलालेखों के अनुसार हरिशचन्द्र नामक ब्राह्मण के दो पत्नियां थी। एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी भद्रा। क्षत्राणी भद्रा के चार पुत्रों भोगभट्ट, कद्दक, रज्जिल और दह ने मिलकर मण्डौर को जीतकर गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना की।

प्रश्न 9   निम्न में से किन अभिलेखों में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है -
अ. कराड़ ब. नीलगुण्ड स. राधनपुर द. देवली

 (अ) अ और स
 (ब) स और द
 (स) अ और ब
 (द) अ, ब, स और द

उत्तर : अ, ब, स और द
व्याख्या :
नीलकुण्ड, राधनपुर, देवली तथा करडाह शिलालेख में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है।

प्रश्न 10   प्रतिहार वंश की मण्डोर शाखा के किस शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता स्थान्तरित की थी -
 (अ) राज्यपाल
 (ब) राजा भोज
 (स) नागभट्ट प्रथम
 (द) यशोवर्धन

उत्तर : नागभट्ट प्रथम
व्याख्या :
नागभट्ट प्रथम ने मेड़ता जीतकर अपनी राजधानी बनाया। इतिहास मे इसे नाहड़ के नाम से जाना जाता है।

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